समर्थक

रविवार, 9 सितंबर 2012

थोड़ी सी शरारत करने दो...

मौसम है हसीं और दिल है जवाँ,
थोड़ी सी शरारत करने दो.........!
ठंडी आहें कब तक मैं भरूँ,
साँसों में हरारत करने दो..........!
तुम रूठो ज़रा मैं मनाऊँ तुम्हें,
हासिल ये महारत करने दो.......!
किस किस को जहाँ में खुश रखूँ,
जो करता हकारत करने दो.......!
हम प्यार करे जी भर के "कमल"
दुनिया को तिजारत करने दो ....!
(हरारत=गर्मी, महारत=विशिष्टता, हकारत=घृणा, तिजारत=व्यापार)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें