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बुधवार, 16 अप्रैल 2014

ये दिल जब आ गया तुझ पर कहीं  अब जा नहीं सकता !
वो ऐसी कौनसी शै है  जो तुझसे पा नहीं सकता !!
कभी तुम बेवफा होंगे , कभी मैं बेवफा हूँगा,
कि ऐसी बात भी मैं तो ज़ेहन  में ला नहीं सकता !
यूँ तो गुनगुनाने की कोशिशें  सब ही करते हैं,
मोहब्बत ऐसा नग्मा है जो हर कोई गा नहीं सकता !
हज़ारों शमा जलती है हुस्न की यूँ तो दुनिया में,
मगर तेरे सिवा दिलबर कोई अब भा नहीं सकता !
"कमल" ये लोग कहते हैं , नहीं वो शख्स है कुछ भी,
ग़मों को सह नहीं सकता , चोट को खा नहीं सकता !


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