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शनिवार, 17 नवंबर 2012

क्या ये दौर वक़्त-ए -नाज़ुक का नहीं?
उसके मुश्ताक हैं सब, इक्का दुक्का नहीं!!
प्यार से समझाओ दिल को बच्चे की तरह,
हर बात का इलाज लात या मुक्का नहीं!
उसने इक निगाह डाली, हमने दिल दे दिया,
बिलकुल , तीर था वो , कोई तुक्का नहीं!
अय मर्ग ज़रा ठहर दो कश  तो मार लूं,
शायद कि दस्तियाब जन्नत में हुक्का नहीं!
"कमल" सा आशिक ना देखा जहाँ में,
महफ़िल में इस बात का यूँ ही रुक्का नहीं !
(मुश्ताक=चाहने वाला, मर्ग =मौत, दस्तियाब=उपलब्ध, रुक्का=शोर)

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

ज़िन्दगी एक बाँसुरी है

चलो माना कि "ज़िन्दगी एक बाँसुरी है "!
प्यार का राग ना गाया तो फिर बेसुरी है!!
बदला ना देना गलत का गलत से,
दे देना माफ़ी बड़ी बहादुरी है!
बदलती ही रहती है रंग अपने दुनिया,
कभी है भली तो कभी ये बुरी है!
चुराके मेरा दिल है कितने खुश वो,
खुश मैं भी, भले चीज़ मेरी चुरी है!
"कमल" बच के रहना ऐसे लोगो से,
मुँह में है राम और बगल में छुरी है!
जब तक तेरा मेरा जहान में वजूद रहेगा !
ये जज्बा-ए -इश्क भी यूँ ही मौजूद रहेगा!!
राह-ए-उल्फत में हम पा ही लेंगे एक दिन,
कारवाँ,  जानिब-ए -मंजिल-ए -मक़सूद रहेगा!
हसरत -ए -दीदार पूरी होते ही बढ़ जाती है,
सिलसिला ये, मिसाल-ए -सूद दर सूद रहेगा!
जब भी हम मिलेंगे तो मिलेंगे खुलकर,
ना कोई तकल्लुफ, ना ऐलान-ए -हदूद रहेगा!
आ जाओ, अभी तो चिराग-ए -चश्म है रोशन,
"कमल" ना रोशनी और ना फिर दूद रहेगा!
(जज्बा-ए -इश्क=प्रेम भावना, जानिब-ए -मंजिल-ए -मक़सूद=इच्छित लक्ष्य की ओर , मिसाल-ए -सूद दर सूद=चक्रवृद्धि ब्याज की तरह, ऐलान-ए -हदूद=सीमा की घोषणा , दूद=धुआं )

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

सखी ! वो क्यों नहीं आये आज?
कुछ भी नहीं हुई थी अनबन,
भूल गये वो प्रीत का बंधन,
किसके लिए रहूँ मैं बनठन,
बिन उनके, सब बिगड़े काज......१
सूना आंगन शैया सूनी,
जलता ह्रदय जैसे हो धूनी,
मन की व्यथा हुई है दूनी,
आज विरह का छाया राज..........२
आयेंगे वो , मत दे दिलासा,
मन भी प्यासा, तन भी प्यासा,
बढती जाये प्रेम-पिपासा,
कहूँ क्या आगे, आये लाज.........३
....रचियता:कमल शर्मा

सोमवार, 12 नवंबर 2012

आठों पहर

आठों पहर अब तेरे ही ख्वाब-औ-ख्याल है!
हमको जुदा करे जो, किसकी मजाल है!!
तेरे बिना अधूरा है फ़साना-ए-ज़िन्दगी,
है मुस्तकबिल तू मेरा और तू ही हाल है!
तू साथ ना था जब तक कोई बात नहीं थी,
अब तेरे बगैर दिलबर जीना मुहाल है!
तेरा इश्क मैंने पाया जो बेशकीमती है,
क्यूँ ना कहूँ मैं ये दिल मालामाल है!
लिखना ग़ज़ल सिखाया मुझे तेरी अदा ने,
कहने लगी दुनिया "कमल" तो कमाल है!
(मुस्तकबिल=भविष्य, हाल=वर्तमान)

कवित्त

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मन की उमंग में, ह्रदय की तरंग में, दीयों के संग में, आयी है दीपावली!
आनंद अपार सा, प्रेम का संचार सा, नया संसार सा, लायी है दीपावली!!
निर्धन धनिक को, व्यापारी बनिक को, बेचते मनिक को, भायी है दीपावली!
"कमल" के कवित्त में, जन मानस के चित्त में, रुपया पैसा वित्त में, छायी है दीपावली!!
(दीया=दीपक, धनिक=धनवान. बनिक=बनिया, मनिक=मणि, वित्त=धन)
सभी मित्रों को कमल शर्मा की ओर से दीपावली की ढेर सारी शुभ कामनायें......
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शनिवार, 10 नवंबर 2012

हो मुबारक ये दिवाली

रोशनी सूरज से लेकर,
आओ ! जलायें यूँ चिराग!
और जला डाले, दिलों पे,
लग गए जो गम के दाग!!
आओ! अब की बार ये,
खाएं दिवाली पर क़सम!
जब तलक मंजिल नहीं,
रुक के हम ना लेंगे दम!
फूलझड़ी से जगमगाओ,
पटाखों चरखी के शोर से!
हो मुबारक ये दिवाली,
तुमको "कमल" की ओर से !