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बुधवार, 7 अगस्त 2013

आ रहा हूँ कल मैं मिलने तुझसे तेरे गाँव में. . .

शहर की इन गलियों में घुट रहा है मेरा दम,
आग लेकिन पेट की दूर ले आई सनम,
पड़ गयी मजबूरियों की बेडी मेरे पाँव में,
आ रहा हूँ कल मैं मिलने तुझसे तेरे गाँव में. . .

इक तरफ दुनिया खड़ी इक तरफ मेरा प्यार है,
फैसला किस्मत पे है जीत है या हार है,
देखते हैं कौन जीते इश्क के  इस दाँव में,
आ रहा हूँ कल मैं मिलने तुझसे तेरे गाँव में. . .

सुबह होते चल पडूँगा छोड़ कर ये राग रंग,
मुझको कुछ नहीं चाहिए सिर्फ तू और तेरा संग,
तुम वहीँ इन्तिज़ार करना गुलमोहर की छाँव में,
आ रहा हूँ कल मैं मिलने तुझसे तेरे गाँव में. . .

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